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संक्षिप्त विवरण

आधारभूत ब्रह्माण्ड एक गणितीय भौतिक संरचना है। इस संरचना को सिर्फ भौतिकीय संरचना मानना गलत होगा। क्योंकि इसके भौतिक स्वरुप को समझने के लिए गणित की आवश्यकता होती है। गणित की अनुपस्थिति में यह संरचना अधूरी जान पड़ती है। क्योंकि हम इस संरचना के वास्तविक स्वरुप से रूबरू नहीं हो पाते। यह संरचना गणित की अनुपस्थिति में एक से अधिक भौतिकीय अर्थों को दर्शाती है।

आधारभूत अर्थात अपरिवर्तित पदार्थ.. जैसा की नाम से ही स्पष्ट है कि ब्रह्माण्ड में आधारभूत गुणों का अस्तित्व है। जिसके कारण ब्रह्माण्ड को विषय मान कर चर्चा की जाती है। परिवर्तित पदार्थ को विषय नहीं माना जा सकता। क्योंकि परिवर्तन के पश्चात् चर्चा का स्वरुप ही बदल जाएगा। हाँ.. परिवर्तन को विषय मानकर चर्चा की जा सकती है परन्तु उसके लिए जरुरी होगा कि परिवर्तन का एक निश्चित या निर्धारित, क्रम या तरीका हो। आधारभूत ब्रह्माण्ड का विश्लेषण पूर्णतः संगत परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया है। यदि आधारभूत ब्रह्माण्ड के विश्लेषण द्वारा बतलाई गईं परिस्थितियाँ, वास्तविक परिस्थितियों से भिन्न पाई जाती हैं। तब हमें मानना होगा कि असंगत परिस्थितियों का अस्तित्व भी संभव है। तब हमें एक नए दौर से वैज्ञानिक घटनाओं को विश्लेषित और परिभाषित करना होगा।

वर्तमान में हमने आधारभूत ब्रह्माण्ड को एक विशिष्ट संरचना के रूप में देखा है। इस संरचना के विश्लेषण द्वारा हमको महा-एकीकृत वर्गीकरण का फिलो-ग्राफ प्राप्त होता है। जिसके अनुसार सिद्धांतों, मूल अवयवों, राशियों, मूलभूत बलों, कणों, नियमों, विषयों और मनुष्यों की अवधारणाओं को एकीकृत किया जा सकता है। इसके बावजूद हमें ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न होती हुई नही दिखलाई देती कि हम यह कह पाएँ कि "ज्ञान प्राप्त करने के लिए अब कुछ शेष नहीं रह गया।" क्योंकि समय के साथ भौतिकता के रूपों में परिवर्तन होता है। फलस्वरूप व्यवहारिक गुणों में नए-नए आयाम देखने को मिलते हैं। सबसे महत्वपूर्ण आश्चर्य तब देखने को मिलता है। जब ब्रह्माण्ड में स्वतः संख्यात्मक और गुणात्मक विकास होते हुए देखते है। इस कारण हम आधारभूत ब्रह्माण्ड की संरचना से जुड़े ज्ञान को अनवरत प्राप्त करते रहेंगे।

1 comment:

  1. 1/x is infinite if x=0 (so the universe is )
    now if x is just near 0 from -ve or +ve side we will go on either side of universe
    now where exists the infinite of universe
    it forces us to think the both sides of universe meets each other
    on opposite side of 0 on no. line

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